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अफगानिस्‍तान से आकर बसे हिंदू और सिख शरणाथियों के चेहरे पर मुस्‍कान

केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को संसद में सिटीजनशिप बिल 2016 पेश किया गया है। इस बिल के पेश होने के साथ ही देश में अफगानिस्‍तान से आकर बसे हिंदू और सिख शरणाथियों के चेहरे पर मुस्‍कान आ गई है। इस बिल की वजह से 40 वर्षों से भारत की नागरिकता हासिल करने का इंतजार कर रहे हजारों सिख और हिंदू शरणार्थियों को देश की नागरिकता हासिल हो सकती है। जो बिल संसद में पेश किया गया है उसका नाम है सिटीजनशिप एमेंडमेंट बिल-2016 और इस बिल में एक्‍ट ऑफ 1955 में संशोधन का प्रस्‍ताव किया गया है। बिल को लोकसभा में मंजूरी दे दी गई है और अब राज्‍यसभा में इसके पास होने का इंतजार है।

तीन देशों के छह समुदायों को नागरिकता

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प्रस्‍तावित बिल को लोकसभा में दूसरी पार्टियों जैसे कांग्रेस और लेफ्ट के कड़े विरोध के बीच पास करा लिया गया है। बिल में अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान से आए कुछ अल्‍पसंख्‍यक समुदायों को भारत की नागरिकता देने का प्रस्‍ताव किया गया है। बिल में अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान से आए हिंदु, सिख, जैन, बौद्ध, क्रिश्चियन और पारसी इन छह समुदायों को चिन्हित किया गया है। इन सभी को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। 31 दिसंबर 2014 से भारत आए इन समुदायों के लोगों को बिल पास होने के बाद भारत की नागरिकता मिल सकेगी। साल 2015 और 2016 में इन समुदाय के लोगों को दीर्घकालीन वीजा दिया गया था। इससे पहले इन लोगों को सुरक्षा प्रदान की गई थी।

स्‍टे वीजा पर भारत में रुके शरणार्थी

राज्‍य सरकार और जिला अथॉरिटीज की ओर से सुरक्षा का जायजा लेने के बाद ही इन्‍हें नागरिकता दी जाएगी। वहीं नागरिकों के लिए भारत में निवास की अवधि को नए बिल में 12 वर्ष से घटाकर सात वर्ष किया गया है। यह नया कानून असम में लागू नहीं होगा लेकिन यहां पर गुजरात, राजस्‍थान, दिल्‍ली और मध्‍य प्रदेश से आकर जो लोग बसे होंगे उन्‍हें राहत दी जाएगी। इस बिल के तहत शरणार्थियों को फायदा मिलेगा चाहे वह देश के किसी भी राज्‍य में रह रहे हों। बताया जा रहा है कि दिल्‍ली में करीब 15,000 शरणार्थी ऐसे हैं हैं जो अफगानिस्‍तान से आए हैं। 90 प्रतिशत के पास ‘स्‍टे वीजा’ है। इस वीजा की अवधि हर वर्ष बढ़ाई जाती है। अफगानिस्‍तान से हिंदु और सिख शरणार्थियों का पहला बैच राष्‍ट्रपति नजीबुल्‍ला की हत्‍या के बाद भारत आया था। उसके बाद से देश में हत्‍या, शोषण, अपहरण और धर्म परिवर्तन के मामलों में इजाफा होता जा रहा था।पाक शरणार्थियों को मिली नागरिकता

स्‍टे वीजा के तहत पांच वर्ष तक रुकने की मंजूरी मिलती है। लेकिन इसके साथ ही दो भारतीय नागरिकों को हर शरणार्थी के लिए गारंटी देनी पड़ती है। असम में जूक्‍तो ऑर्गनाइजेशन के शुभीमल भटाचार्जी कहते हैं कि यह बिल आपको सीधे नागरिकता नहीं देता है लेकिन नागरिकता का रास्‍ता खोल देता है। जूक्‍तो ने असम में इसी तरह के शरणार्थियों के लिए काम किया था। मनोहर सिंह जो अफगान शरणार्थी हैं और खालसा दिवान वेलफेयर सोसायटी के प्रेसीडेंट हैं, कहते हैं कि पिछले करीब 20-25 वर्षों से देश में नागरिकता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि जिस समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के पीएम थे तो उस समय कई पाकिस्‍तानी शरणार्थी राजस्‍थान और गुजरात चले गए। इन सभी लोगों को तो नागरि‍कता मिल गई लेकिन अफगानिस्‍तान से आए शरणार्थियों को इंतजार करना पड़ रहा है।

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