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इस वजह से स्कूल में बच्चे ने बना दी नग्न लड़की की ऐसी तस्वीर

मैं उसे ये समझाने की कोशिश करती रही कि ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है. हर इंसान सेक्स करता है अगर इस मामले में कुछ ज़रूरी है तो वो है सुरक्षा. हमने अपनी बातचीत जारी रखी और आख़िरकार उसनें मुझे बताया कि उसे असल में पता ही नहीं है कि सेक्स होता कैसे है.

उसे ये भी नहीं पता था कि एक पुरुष का जननांग दिखता कैसा है. इसके बाद मैंने उसे सारी चीज़ें विस्तार से समझाई और चित्र बनाकर दिखाया कि असल में सेक्स कैसे होता है. सच्चाई ये थी कि उस लड़की ने सेक्स किया ही नहीं था.

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“आज मेरे पास 17 साल की एक लड़की आई. वो काफ़ी ग़रीब परिवार से थी. उसने मुझे बताया कि बॉयफ़्रेंड से सेक्स करने के बाद उसने आईपिल (गर्भ निरोधक दवा) ले ली है. वो बहुत घबराई हुई थी और मेरे सामने शर्मिंदा महसूस कर रही थी. वो मुझसे बार-बार कह रही थी ये बस एक बार हुई ग़लती है और दोबारा ये ग़लती नहीं होगी.

यहां तक कि उसने प्रेगनेंसी रोकने के लिए उसने गर्भनिरोधक दवा भी खा ली. ज़रा सोचिए कि हमने अपने बच्चों को किस क़दर अकेला छोड़ दिया है. सोचिए कि वो लड़की कितना बेहतर महसूस करती अगर उसके पास सही जानकारी होती और अगर वो एक ऐसे समाज में रह रही होती जहां उसे ग़लत न समझा जाता.”

डॉ. शारदा की ये पोस्ट सोशल मीडिया पर छा गई और इसे 1,500 से ज़्यादा लोगों ने शेयर किया.

‘सेक्स शब्द सुनते ही असहज हो जाते हैं लोग’
बातचीत में डॉ. शारदा ने कहा कि अगर मैं अपने मरीज़ों से ज़रूरत पड़ने पर उनकी ‘सेक्स लाइफ़’ के बारे में पूछती हूं तो कई बार वो सेक्स शब्द सुनते ही नज़रें चुराने लगते हैं. यहां तक कि शादीशुदा लोग भी खुलकर इस बारे में बात नहीं कर पाते.

डॉ. शारदा का मानना है कि स्कूल-कॉलेजों में सेक्स एजुकेशन के नाम पर ख़ाना-पूर्ति और सेक्स को अनैतिक समझने की भूल इसकी दो बड़ी वजहें हैं.

अपनी बात समझाने के लिए डॉक्टर शारदा अपने स्कूल के दिनों का एक क़िस्सा साझा करती हैं. उन्होंने बताया, “मैं केरल से हूं जो भारत के सबसे शिक्षित राज्यों में से है. वहां भी हमें रिप्रोडक्टिव सिस्टम (प्रजनन तंत्र) के बारे में विस्तार से नहीं पढ़ाया गया. इतना ही नहीं, जब प्रेगनेंसी के बारे में पढ़ाए जाने की बारी आई तो लड़कों और लड़कियों को अलग-अलग कमरों में ले जाया गया.”

यानी सेक्स और प्रेगनेंसी ऐसे विषय माने गए जिसके बारे में लड़कों और लड़कियों से एक साथ बात नहीं की जा सकती.

डॉ. शारदा कहती हैं, “ये कितनी बड़ी विडंबना है कि जो दो समूह सेक्स की प्रक्रिया का अहम हिस्सा होते हैं, उन्हें अलग-अलग ले जा कर इसकी दी जा रही है.”

दूसरी वजह पर आते हुए डॉ. शारदा कहती हैं, “मेरी उम्र 30 साल से ज़्यादा है और मेरी मां आज भी मेरी सेक्स लाइफ़ को कंट्रोल करने की कोशिश करती हैं क्योंकि मेरी शादी नहीं हुई है और इसकी वजह भी सेक्स को नैतिकता से जोड़कर देखा जाना है.”

यानी सेक्स के बारे में बात न होने की दूसरी वजह ये माना जाना है कि शादी के बाद, बंद कमरों में बत्तियां बुझाने के बाद ही इस बारे में सोचा जा सकता है.

यही कारण है कि स्कूलों में अधिकतर शिक्षक बच्चों को सही और विस्तृत जानकारी देने से हिचकिचाते हैं. शिक्षकों को न तो ऐसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने की ट्रेनिंग मिली है और न ही वो इस समाज के बाहर से आते हैं.

ज़ाहिर है, वो भी चीज़ों को उसी चश्मे से देखते हैं जैसे बाक़ी लोग.

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