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इंडियन आईटी कंपनियों की कमाई पर पड़ा बुरा असर

चाइना के साथ बढ़ते व्यापार युद्घ  अमेरिकी मोबाइल निर्माता कंपनी एपल के राजस्व में गिरावट से अमेरिका में स्लोडाउन की संभावना गहराती जा रही है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका में स्लोडाउन का व्यापक असर पड़ता है तो इसके प्रभाव से इंडियन आईटी कंपनियों की कमाई बहुत ज्यादा घट जाएगी.

हालिया रिपोर्ट में बोला गया है कि अमेरिका में स्लोडाउन की गहराती संभावना से एक हजार लोकल कंपनियां अपनी तकनीक पर खर्च में कटौती कर सकती हैं जिसका प्रभावटीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजी, विप्रो  टेक महिंद्रा जैसी इंडियन आईटी कंपनियों के राजस्व पर पड़ेगा. इन कंपनियों की आर्थिक स्वास्थ्य से जुड़ी डाटा विश्लेषण कृत्रिम बुद्घिमत्ता जैसी डिजिटल सेवाओं पर भी इस स्लोडाउन का व्यापक प्रभाव पड़ेगा.

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विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर तकनीकी संसार पर भी दिखेगा  आईटी कंपनियों का राजस्व कम होगा. साल 2018 के आखिर में प्रारम्भ हुआ अमेरिकी स्लोडाउन का प्रभाव 2019 में  गहरा सकता है. वैश्विक रेटिंग एजेंसी मॉर्गन स्टेनली ने साल 2019 में 2.3 प्रतिशत वृद्घि का अनुमान जताया है जो 2018 में 2.9 प्रतिशत था.

दो तिहाई कमाई अमेरिका से

हिंदुस्तान की पांच बड़ी आईटी कंपनियों की दो तिहाई से ज्यादा यानी करीब 70 प्रतिशत तक कमाई अमेरिका से होती है. यही कारण है कि पिछले 12 महीनों के दौरान इंडियन आईटी आउटसोर्सिंग उद्योग वृद्घि कर रहा है. अमेरिका में डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने से इंडियन आईटी कंपनियों ने भी ज्यादा भर्तियां की  पहली छमाही में 40 प्रतिशत तक वेतन बढ़ोतरी भी की है.

नीचे आए आईटी कंपनियों के शेयर

अमेरिकी स्लोडाउन की संभावना से बीएसई पर बृहस्पतिवार को टीसीएस के शेयरों में 1.39 प्रतिशत  इंफोसिस में 0.26 प्रतिशत की गिरावट आई थी. इसी तरह शुक्रवार को निफ्टी पर भी आईटी सूचकांक 1.53 प्रतिशत नीचे आ गया.

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