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UPSC: सिविल सर्विसेज परीक्षा में हिंदी और इंग्लिश मीडियम के स्टूडेंट के बीच बड़ा अंतर

देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में शुमार की जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सर्विसेज परीक्षा में हिंदी और इंग्लिश मीडियम के स्टूडेंट के बीच पास होने वाले उम्मीदवारों में एक बड़ा अंतर सामने आया है. हाल ही में हुई परीक्षाओं से ये आंकड़े सामने आए हैं कि परीक्षा में हिंदी मीडियम से पास होने वाले छात्रों की तादाद में भारी गिरावट आई है.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मसूरी के लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग ले रहे 370 अधिकारियों में से सिर्फ 8 ने सिविल की परीक्षा हिंदी में दी.

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बात सिर्फ हिंदी माध्‍यम में परीक्षा देने तक ही सीमित नहीं है. सिविल सर्विस में चुने जाने वाले हिंदी मीडियम स्कूल और यूनिवर्सिटी से पढ़े उम्मीदवारों की संख्या भी काफी घट गई है. UPSC में हिंदी मीडियम के छात्रों की तादाद गिर रही है और इंग्लिश मीडियम वाले स्टूडेंट्स में भारी बढ़ोतरी हुई है.

सिविल सेवा में चयनित होने वाले हिंदी मीडियम उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट दर्ज होने का सिलसिला 2011 के बाद शुरू हुआ. इसी साल सरकार ने सीसैट (CSAT) लाने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद 2013 में सिविल सर्विस मेन परीक्षा में भी बदलाव किया गया था. दो वैकल्पिक विषयों की बजाय एक विषय को विकल्प के तौर पर छात्र चुन सकते थे.

LBSNAA की बेबसाइट के मुताबिक, 2013 में हिंदी मीडियम में सिविल की परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स 17 परसेंट थे. ये आंकड़ा 2014 में 2.11 परसेंट रहा. 2015 में 4.28 परसेंट था, वहीं 2016 में 3.45 परसेंट और 2017 में 4.06 परसेंट. वहीं 2018 में हिंदी मीडियम में सिलेक्ट होने वाले उम्मीदवारों का परसेंट घटकर 2.16 रह गया.

दिल्ली के मुखर्जी नगर में UPSC परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों ने सीसैट से प्रभावित होने के कारण अपने लिए छूट की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया. उनका कहना है कि सीसैट एग्जाम पैटर्न को लेकर जो छात्र प्रभावित हुए, उन छात्रों को 2019, 2020 और 2021 की परीक्षा देने के लिए इजाजत दी जाए.

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