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तकिए के नीचे हुआ आधी रात को धमाका, दामाद की हुई मौत

जमाना हाईटेक हो गया है। हर हाथ में मोबाइल फोन है। शायद ही कोई ऐसा श्ख्स होगा जो मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता हो। संचार के लिहाज से मोबाइल फोन न केवल हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया बल्कि हमें इसकी आदत भी हो गई है। कोई भी शख्स बिना मोबाइल के रह ही नहीं पाता है।

यहां तक की रात को सोते समय भी अधिकांश लोग अपना मोबाइल भी बिस्तर पर ही रखते हैं। अब इसी सुविधा का दूसरा स्याह पहलू भी जान लो और वो ये है कि मोबाइल फोन हमारे लिए खतरे की घंटी भी है। ( Blast in Mobile phone) मोबाइल फोन में कभी भी ब्लास्ट हो सकता है। जान तक जा सकती है। नहीं हो रहा यकीन तो राजस्थान के ये चंद मामले देख लो।

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चलती गाड़ी में मोबाइल फटा, व्यापारी झुलसा

यह मामला दौसा में आगरा रोड का है। व्यापारी गिर्राज गुप्ता गाड़ी में सवार होकर घर से निकला था। उसका अपना स्मार्ट फोन गाड़ी में ही सीट पर रखा हुआ था। चलती गाड़ी में अचानक ब्लास्ट हुआ। एकबारगी तो कुछ समझ नहीं आया। बाद में मोबाइल फोन से उठता धुआं देख पता चला कि ब्लास्ट उसी में हुआ था। व्यापारी भी झुलस गया था हालांकि उसी समय तत्परता दिखाते हुए वह गाड़ी से नीचे उतर गया। मोबाइल में हुए ब्लास्ट से गाड़ी का शीशा भी टूटा गया।

मोबाइल पास में रखकर सोया, रात ढाई बजे ब्लास्ट के बाद मौत

दूसरा मामला राजस्थान के चितौड़गढ़ का है। यहां 60 वर्षीय किशोर सिंह बीती रात सोया तो मोबाइल तकिए के पास रख लिया। रात करीब ढाई बजे अचानक ब्लास्ट से किशोर की नींद टूटी। देखते ही देखते किशोर के कपड़ों व बिस्तर ने आग पकड़ ली। परिजन किशोर को झुलसी हुई हालत में अस्पताल लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

ससुराल में फटा मोबाइल, दामाद की मौत

तीसरा मामला सीकर जिले के गांव श्यामपुरा का है। नागौर की नावां तहसील के गांव लिचाना निवासी हरदेव गुर्जर इसी साल रक्षाबंधन पर पत्नी के साथ ससुराल गांव श्यामपुरा आया था। हरदेव ने अपना मोबाइल चार्जर पर लगाया। इसी दौरान जोरदार धमाका हुआ और मोबाइल व चार्जर में करंट दौड़ गया। उसकी चपेट में आने से हरदेव घायल हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

मोबाइल ने ली बच्चे की जान

चौथा मामला भीलवाड़ा जिले के गांव गाडोली का है। यहां 14 वर्षीय योगेन्द्र ने रात नौ मोबाइल चार्जर में लगाया और इसी दौरान ब्लास्ट हो गया। उसमें योगेन्द्र को जबड़ा पूरी तरह से जख्मी हो गया था। मोबाइल व बैटरी के टुकड़े टुकड़े हो गए थे। धमाके की आवाज परिजन कमरे में आए तो योगेन्द्र बेसुध पड़ा था। उसे अस्पताल लेकर गए, मगर उसकी जान नहीं बच सकी।

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