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राम मंदिर पर बढ़ी मोदी गवर्नमेंट की चुनौती

राम मंदिर निर्माण मामले में संघ परिवार ने ही मोदी गवर्नमेंट के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. पीएम मोदी के संवैधानिक प्रक्रिया पूरा होने के बाद अध्यादेश पर विचार संबंधी राय के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उन्हें पालमपुर में राम मंदिर निर्माण के प्रस्ताव की याद दिलाई है. वहीं विहिप ने दो टूक शब्दों में बोला है कि अदालती निर्णय का हिंदू अनंत काल तक इंतजार नहीं कर सकते. खासबात यह है कि राम मंदिर मुद्दे को धार देने केलिए खुद संघ प्रमुख संघ के इतिहास में पहली बार  31 जनवरी को आयोजित विहिप की धर्मसंसद में भाग ले रहे हैं. 

दरअसल मंगलवार को एक इंटरव्यू में पीएम ने बोला था कि अध्यादेश पर विवार संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने केबाद किया जाएगा. उन्होंने बोला था कि तीन तलाक  एससीएसटी एक्ट पर भी गवर्नमेंट ने न्यायालय केफैसले के बाद अध्यादेश जारी किया था. इतना ही नहीं पीएम ने यह भी बोला था कि बीते चुनाव में भी बीजेपी ने संवैधानिक रास्ते से राम मंदिर निर्माण की बात कही थी.

इसके बाद संघ ने बयान जारी कर पीएम को पालमपुर में पार्टी के अधिवेशन में प्रस्तावित उस प्रस्ताव की याद दिलाई जिसमें हर मूल्य पर राम मंदिर निर्माण की बात कही गई थी.इतना ही नहीं संघ ने यह भी बोला कि हिंदुओं की ख़्वाहिश है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण इसी गवर्नमेंट के कार्यकाल में हो. इसके अगले दिन विहिप ने भी अपनी सहमति दर्ज कराते हुए राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश जारी करने की मांग करते हुए बोला कि आस्थावान हिंदू अनंत काल तक न्यायालय के निर्णय का इंतजार नहीं कर सकते.

धर्मसंसद में संघ प्रमुख के होने के मतलब 

विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बोला कि मोदी गवर्नमेंट मंदिर बनाने की राह पर है, बस इसमें समय केसुधार की आवश्यकता है. हम अब अनंत काल तक इसकेलिए इंतजार नहीं सकते. अध्यादेश लाना गवर्नमेंट के वश में है. उन्होंने बोला कि सभी दलों से समर्थन हासिल करने के लिए विहिप ने 350 सांसदों से मुलाकात की है. कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलने का समय मांगा है.

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अयोध्या आंदोलन प्रारम्भ होने से अब तक जितने भी धर्म संसद का अयोजन हुआ उसमें संघ प्रमुख तो दूर संघ के सह कार्यवाह तक ने शिरकत नहीं की. संघ ने इसे विहिप पर छोड़ रखा था. यहां तक कि इस आंदोलन के उफान पर होने केबावजूद संघ ने इससे दूरी बनाई. मगर अब 31 जनवरी के धर्मसंसद में खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत शिरकत करेंगे. संघ की योजना इस मुद्दे पर गवर्नमेंट सहित सभी सियासी दलों पर दबाव बनाने की है.

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