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लोकतंत्र सेनानी पेंशन में ऐसी गड़बड़ी से हिल गया प्रशासन

अक्सर देश में अफसरों के बड़े-बड़े घोटाले की खबरें मीडिया की सुर्खियां बनती है। लेकिन 2016 में सपा सरकार द्वारा फिर से शुरू की गई लोकतंत्र सेनानी पेंशन में ऐसी गड़बड़ी सामने आई है, जिससे प्रशासन भी हिल गया है। राजधानी लखनऊ में जांच के दौरान पाया गया कि लोकतंत्र सेनानी की पेंशन में एक हिस्ट्रीशीटर का नाम भी शामिल है। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी अपात्रों को पेंशन बांटी गई है।

लखनऊ में जिन 124 लोगों को लोकतंत्र सेनानी पेंशन दी जा रही थी, उनमें मड़ियांव के घैला गांव निवासी जाकिर अली (71) भी शामिल है। जाकिर मड़ियांव थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 197-ए है। जाकिर पर 12 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद उसको लोकतंत्र सेनानी की पेंशन मिल रही है। शासन के निर्देश पर डीएम कौशलराज शर्मा ने जांच करवाई तो यह सच सामने आया। इसी के साथ पीलीभीत जिले में 150 लोगों को लोकतंत्र सेनानी की पेंशन दी जा रही है। इनमें से 23 लोकतंत्र सेनानी ऐसे सामने आ रहे हैं, जिन पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है। शासन ने गोपनीय शिकायत के बाद पीलीभीत के डीएम से लोकतंत्र सेनानी का सत्यापन करवाकर उनसे रिपोर्ट मांगी है। इसकी भी जांच तेज कर दी गई है।

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प्रदेश के ऐसे राजनीतिक बंदियों को यह पेंशन सम्मान राशि के रूप में दी जाती है, जिन्होंने इमरजेंसी (आपातकाल : 25 जून, 1975 से लेकर 21 मार्च, 1977 तक) लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष किया और आपातकाल के विरोध में डीआईआर और मीसा व अन्य धाराओं में जेल में बंद रहे। 2006 में सपा सरकार ने यह पेंशन योजना शुरू की थी। 2007 में बीएसपी सरकार ने इसे खत्म कर दिया था, लेकिन 2016 में सपा सरकार आई तो फिर से योजना शुरू कर दी गई थी। शुरुआत में लोकतंत्र सेनानियों को पांच हजार रुपये पेंशन दी जाती थी। बाद में इसे 15 हजार कर दिया गया था। पिछले साल जून में भाजपा सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रति माह कर दी।

प्रदेश में करीब छह हजार लोकतंत्र सेनानी हैं। इनको दी जाने वाली पेंशन पर सरकार को 35.35 करोड़ से अधिक हर महीने खर्च हो रही है। साथ ही लोकतंत्र सेनानियों को रोडवेज में नि:शुल्क यात्रा और जिला अस्पतालों में नि:शुल्क चिकित्सा की भी सुविधा दी गई है।

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