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10 दिनों में मिलेगी दिल्ली मेट्रो फेज-4 को हरी झंडी!

दिल्ली मेट्रो फेज-4 की अनुमति को लेकर वर्षों से चल रहे इंतजार की घड़ी जल्द समाप्त होने वाली है। दिल्ली सरकार जल्द ही फेज-4 को लेकर आगामी 10 दिनों में हरी झंडी देने वाली है।

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आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए आप सरकार दिल्ली मेट्रो फेज-4 को जल्द ही मंजूरी देगी। वर्ष 2017 में दिल्ली सरकार ने फेज-4 को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। लेकिन वित्तीय मामला हल न होनेे व कई रूटों पर आपत्ति होने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल सकी थी।

दिल्ली मेट्रो फेज-4 को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार अलग-अलग सभी छह कॉरिडोर का सर्वे करा रही है। केंद्र सरकार सभी छह कॉरिडोर पर मेट्रो चलाना चाहती है। जबकि दिल्ली सरकार सही स्थिति का जायजा लेकर संबंधित कॉरिडोर के लाभकारी होने पर ही दायरा बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

राजधानी में जाम के साथ जो सबसे बड़ी समस्या है वह है प्रदूषण। जाम और प्रदूषण दोनों से बचने के लिए सबसे कारगर उपाय है मेट्रो। अगर राजधानी के कोने-कोने में मेट्रो चलने लगेगी तो लोग उसका उपयोग करेंगे और सड़क से वाहनों की संख्या कम होगी। इससे जाम से भी थोड़ी राहत मिलेगी और प्रदूषण का स्तर पर भी घटेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। यही नहीं मेट्रो हर तरफ हो जाएगी तो लोगों का समय भी खूब बचेगा।

इसी आशा के साथ मेट्रो फेज-4 की योजना की तरफ दिल्ली की जनता देख रही है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार भी इसको लेकर गंभीर है और केन्द्र सरकार की तरफ से भी काम किया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर राजनीति कतई नहीं की जानी चाहिए और न ही पक्ष-विपक्ष को एक दूसरे पर आरोप ही लगाने चाहिए, कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि दिल्ली वालों को किसी भी तरह राजधानी के कोने-कोने में जाने के लिए जन परिवहन की सुविधा उपलब्ध हो।

विकल्प के रूप में मेट्रो हो तो बात ही क्या कहना। इससे अच्छा तो कुछ हो ही नहीं सकता, सुरक्षा की सुरक्षा और सड़क के जाम, प्रदूषण और शोर से भी राहत।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने पिछले दिनों यह बयान दिया कि दिल्ली सरकार मेट्रो फेज-4 के काम को रोकना चाहती है। लेकिन, इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक सभा में साफ कह दिया कि वह शीघ्र ही मेट्रो फेज-4 को मंजूरी देंगे। एक बात इसमें जरूर सामने आ रही है कि अगर किसी रूट पर यात्रियों की संख्या ही कम होगी तो उस पर नए सिरे से विचार किया जाएगा।

समझने वाली बात है कि हजारों करोड़ रुपए की लागत से बनाई जाने वाली मेट्रो की योजना को अंतिम रूप देने से पहले हर पहलू पर विचार करना तो जरूरी है। अगर किसी रूट पर यात्रियों की संख्या कम है और किसी जगह मेट्रो की ज्यादा दरकार है तो इसमें तुलना करके बदलाव करना तो तर्कसंगत है ही।

रखना होगा पुरानी लाइनों का ख्याल
नई लाइनों के लिए काम तो शुरू किया ही जाना चाहिए, लेकिन पुरानी लाइनों पर ट्रेन संचालन सुचारू ढंग से चलता रहे, इसके लिए चुस्ती भी जरूरी है। सरकार और मेट्रो प्रबंधन को इस बात पर गौर करना चाहिए कि आखिर कौन सी दिक्कतों के कारण यात्रियों को समय-समय पर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मसलन, ओवर हेड वायर में खराबी आने से पूरी मेट्रो लाइन पर यातायात चौपट हो जाता है। जिस लाइन पर खराबी आती है कि उस पर शुरू से लेकर अंत तक जगह-जगह ट्रेनें खड़ी हो जाती हैं। कई ट्रेनों को खाली करा लिया जाता है और यात्रियों को पैदल कर दिया जाता है। अब खराबी बताकर तो आती नहीं, ऐसे में मजबूरी में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, लेकिन अगर थोड़ी सतर्कता और नियमित जांच होती रहे तो तय है कि इस तरह की खराबी कम से कम आएगी।

55 हजार करोड़ रुपए से अधिक का खर्च 
फेज-4 के सभी छह कॉरिडोर पर 55 हजार करोड़ से अधिक का खर्च आएगा। इस राशि पर अभी तक जापानी मदद के लिए हरी झंडी नहीं मिली है। इस खर्च की भरपाई के लिए केंद्र सरकार पीपीपी मॉडल का सहारा लेना चाहती है।

104 किमी में दौड़ानी है मेट्रो
मेट्रो फेज-4 में कुल 104 किलोमीटर रूट पर प्रतिदिन करीब 15 लाख अतिरिक्त यात्रियों के जुडऩे की बात कही गई है। इससे उत्तरी दिल्ली व दूर-दराज से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आवाजाही को लेकर परिवहन के रूप में मेट्रो का बेहतर विकल्प मिलेगा।

तीन रूट पर शीघ्र शुरू होगा काम!

  • जनकपुरी वेस्ट-आरके आश्रम
  • मौजपुर-मुकुंदपुर
  • एयरो सिटी तुगलकाबाद
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