उम्र बढ़ने पर हड्डियों का कमजोर होना यानी ऑस्टियोपोरोसिस एक आम समस्या है. जिससे उनके टूटने/ फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती है. विशेष रूप से कूल्हे, रीढ़ की हड्डी और कलाई की हड्डी में फ्रैक्चर की संभावना अधिक होती है. ऐसी स्थिति में जरा सी चोट लगने या कहीं टकराने पर भी हड्डी टूट जाती है. जेपी हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक्स विभाग के चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार का कहना है कि ऑस्टियोपोसिस के कारण हड्डी टूटने की संभावना 50 फीसदी लोगों में होती है, जबकि स्तन कैंसर की संभावना 9 फीसदी लोगों में तथा दिल की बीमारियों की संभावना 31 फीसदी लोगों में होती हैं.Image result for हड्डियों को बेहद कमजोर बनाती है ये बीमारी

ऑस्टियोपोसिस के लक्षण के बारे में बताते हुए डॉ. अभिषेक कुमार ने कहा, “पीठ में दर्द, जो अक्सर वर्टेबरा में खराबी या फ्रैक्चर के कारण होता है. समय के साथ उंचाई कम होना, पीठ में झुकाव, जिससे हड्डी टूटने की संभावना बढ़ जाती है.” ऑस्टियोपोरोसिस के कारणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “ऐसी कई दवाएं हैं जो ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बन सकती हैं. जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉयड, एंटी-डीप्रेसेन्ट, एंटी-हाइपरटेंसिव, एंटी-कॉन्वलसेंट आदि.

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उन्होंने कहा, “साथ ही जिस व्यक्ति में पहले कभी हड्डी टूटी हो, भविष्य में उसमें ऑस्टियोपोरोसिस के कारण फ्रैक्चर की संभावना अधिक होती है. डिप्रेशन भी कभी कभी ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बन सकता है. क्योंकि डिप्रेशन से एक हॉर्मोन कॉर्टिसोल बनता है, जो हड्डियों से मिनरल्स को सोख कर उन्हें कमजोर बनाता है.” डॉ. अभिषेक कुमार ने सुझाव देते हुए कहा, “व्यायाम करें क्योंकि व्यायाम जैसे सैर करने, योगा आदि से न केवल मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि शरीर में कैल्शियम का संतुलन भी बना रहता है. लेकिन अगर आपकी हड्डियां कमजोर हैं तो जॉगिंग, ट्रेडमिल और टेनिस जैसे व्यायाम आपके लिए सुरक्षित नहीं हैं.”