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सर्जिकल स्ट्राइक: सेना के पराक्रम की जारी हुई नई तस्वीरें

आज ही के दिन दो साल पहले 29 सितंबर को इंडियन आर्मी ने उरी टेरर अटैक का बदला लेने के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में घुसकर लश्कर और जैश के आतंकियों के लॉन्च पैड को नेस्तनाबूद कर दिया। उरी में सैनिकों की शहादत के बाद इंडियन आर्मी ने ठान लिया था कि एलओसी के पार जाकर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जाए। भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने इंडियन आर्मी को खबर कर दी थी कि कहां और किस वक्त दुश्मनों की चौकियों को बर्बाद करना है। इंडियन आर्मी ने एक मिशन के तहत एलओसी के उस पार टारगेट्स को चुना और 28 सितंबर की रात को आतंकियों के लॉन्च पैड्स पर अटैक कर दिए। भारत सरकार के कहने पर सेना ने पहली बार देश के सामने सर्जिकल स्ट्राइक की बात रखी और पिछले साल एक वीडियो भी जारी किया। आज जब भारत पराक्रम दिवस मना रहा है, तो सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की कुछ नई तस्वीरें जारी की है।

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लंबा चला था ऑपरेशन

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सत्तारूढ सरकार ने देश के सामने सर्जिकल स्ट्राइक के ऑरिजनल मिशन की तस्वीरें जारी की है। इन तस्वीरों से पता चलता है कि दुश्मन के ठिकानों तक पहुंचने के लिए सेना का लंबा ऑपरेशन चला था। इंडियन आर्मी ने तय कर लिया था कि आतंकवादियों के लॉन्च पैड को बर्बाद कर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना है।Image result for सर्जिकल स्ट्राइक: सेना के पराक्रम की जारी हुई नई तस्वीरें

मिशन था दुश्मन का ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना

एक बात यहां ध्यान देने की जरुरत है कि आतंकियों के खात्मे के लिए और सीमा पार जाकर अटैक करने का जो प्लान बनाया गया उसके लिए पूरी टीम ही एक स्पेशल स्कॉड टीम थी, जिन्हें घाटी का चप्पा-चप्पा पता था। पूरी टीम को कम से कम 15 साल का घाटी में अनुभव था। इस मिशन का मकसद था कम से कम सेना को नुकसान पहुंचाना और आतंकियों को पूरी तरह से खत्म करना था। मिशन के बाद इंडियन आर्मी का कोई भी जवान पीछे नहीं छूटना चाहिए।Image result for सर्जिकल स्ट्राइक: सेना के पराक्रम की जारी हुई नई तस्वीरें

ऐसे हुआ मिशन पॉसिबल

सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त देश के आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग थे, जो इस पूरी घटना पर कंट्रोल रूम से नजर रख रहे थे। मिशन पर भेजने से पहले जनरल ने अपनी टीम से कहा था, ‘अगर तुम फेल हुए, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी होगी और सफल हुए तो पूरा श्रेय तुम्हें मिलेगा।’ फिर क्या था, 28 सितंबर की शाम को इंडियन आर्मी की अलग-अलग टीमें रवाना हो गई। दुश्मन को भनक ना लगे इसलिए अंधेरे में रॉकेट लॉन्चर्स के साथ टीमें रवाना हुई। रात भर सफर करने के बाद सुबह की पहली किरण से पहले ही लॉन्च पैड पर अटैक हुआ और इंडियन आर्मी ने आगे बढ़ते हुए एक-एक लॉन्च पैड को बर्बाद किए।

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