Wednesday , January 20 2021 9:13
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सरकार के साथ बातचीत फेल होने के बाद किसानों ने उठाया ये बड़ा कदम, पूरे दिल्ली में करने जा रहे…

किसानों के बड़े आंदोलन को देखते हुए आज दिल्ली और एनसीआर में कड़ी सुरक्षा की गई है. सिंधु बॉर्डर समेत अन्य सीमाओं पर हर वाहन की जांच हो रही है.

 

सरकार के साथ बातचीत फेल होने के बाद किसानों ने उठाया ये बड़ा कदम, पूरे दिल्ली में करने जा रहे...

 

 बुधवार को फरीदाबाद के पास किसानों की एक महापंचायत हुई, जिसके कारण सुरक्षा को बड़ा दिया गया. यहां हर वाहन की चेकिंग हो रही है.
रालोद नेता जयंत चौधरी भी सुबह-सुबह सिंधु बॉर्डर पर पहुंचे. जयंत ने कहा कि वो एक नेता नहीं बल्कि किसान के तौर पर यहां आए हैं. बीते दिन भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने भी किसानों का समर्थन किया था.

सरकार के साथ बातचीत फेल होने के बाद किसानों का आंदोलन जारी रहा. सिंधु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही डटे रहे.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल ने बुधवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस बैठक में तीन दिसंबर को होने वाली किसानों के साथ चर्चा पर मंथन हुआ.

केंद्र सरकार की ओर से किसानों से कहा गया था कि सरकार एक कमेटी बनाएगी, जिसमें सरकार के प्रतिनिधि, किसानों के प्रतिनिधि और अन्य लोग होंगे. किसानों और सरकार के बीच जो बातचीत हुई थी, उसमें इस पर एक प्रेजेंटेशन दिया गया था.

कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है. बीते दिन सरकार के साथ बातचीत फेल होने के बाद किसानों ने आक्रामक रुख अपना लिया है. किसानों ने फिर सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकराया है.

जिसमें सरकार ने कमेटी बनाने की बात कही थी. पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में किसान अब दिल्ली की ओर बढ़ने लगे हैं, ताकि यहां मौजूद किसानों को समर्थन दिया जा सके. दूसरी ओर सरकार भी एक्टिव दिख रही है. बुधवार सुबह किसान आंदोलन में क्या बड़ा हुआ, नज़र डालिए..

 किसानों की ओर से अभी भी कड़ा रुख अपनाया जा रहा है. किसान नेता बूटा सिंह का कहना है कि हमने सरकार के कमेटी बनाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. ये आंदोलन को ठंडा करने की कोशिश है.

किसान शाम को अपनी राय प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखेंगे. किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि कल जो मीटिंग हुई थी वो बेनतीजा रही थी. सरकार ने जो कमेटी बनाने की बात कही थी उसपर सबने इनकार कर दिया है क्योंकि कमेटी का मतलब होता है आंदोलन को टरका देना, जिसे सबने एक मत से इनकार कर दिया है. हालांकि, किसान नेता ने कहा कि अभी बातचीत टूटी नहीं है.

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