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श्रीलंका में नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बीच वित्त मंत्री ने दिया ऐसा रिएक्शन

श्रीलंका में नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे शुक्रवार को नये पीएम बन गये  राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने मौजूदा पीएम रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया जिसके बाद वित्त मंत्री ने कड़ी रिएक्शन देते हुए राजपक्षे की इस तरह की वापसी को ‘अलोकतांत्रिक सत्तापलट’ करार दिया पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे के पीएम के रूप में शपथ ग्रहण के दृश्य मीडिया को जारी किये गये  टीवी चैनलों पर दिखाये गए 72 वर्षीय राजपक्षे ने शपथ लेने के बाद सिरिसेना के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की

Image result for वित्तमंत्री के निर्णय को अलोकतांत्रिक ने दिया करार

उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘‘श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने नये पीएम के रूप में शपथ ली ’ इससे पहले सिरिसेना के राजनीतिक मोर्चे यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम अलायंस (यूपीएफए) ने घोषणा की कि उसने मौजूदा साझेदारी गवर्नमेंट से समर्थन लेने का निर्णय किया है यह साझेदारी यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के साथ था जिसके नेता रानिल विक्रमसिंघे अब तक पीएम थे

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वित्तमंत्री ने निर्णय को अलोकतांत्रिक करार दिया
कृषि मंत्री  यूपीएफए के महासचिव महिंदा अमरवीरा ने संवाददाताओं से बोला कि यूपीएफए के निर्णय से संसद को अगवत करा दिया गया है घटनाक्रम पर कड़ी रिएक्शन देते हुए वित्त मंत्री मंगला समरवीरा ने बोला कि पीएम के रूप में राजपक्षे की नियुक्ति असंवैधानिक  अवैध है उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘यह एक अलोकतांत्रिक सत्तापलट है ’

क्यों खड़ा हो सकता है राजनीतिक संकट
2015 में विक्रमसिंघे के समर्थन से सिरिसेना राष्ट्रपति बने थे इससे पहले करीब एक दशक तक राजपक्षे की गवर्नमेंट थी उनकी गवर्नमेंट में सेहत मंत्री रहे सिरिसेना ने उनसे अलग होकर राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजपक्षे को पीएम बनाने के सिरिसेना के कदम से संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है क्योंकि संविधान में 19वां संशोधन बहुमत के बिना विक्रमसिंघे को पीएम पद से हटाने की अनुमति नहीं देगा

राजपक्षे  सिरिसेना की कुल 95 सीटें हैं  सामान्य बहुमत से पीछे हैं विक्रमसिंघे की यूएनपी के पास अपनी खुद की 106 सीटें हैं  बहुमत से केवल सात कम हैं विक्रमसिंघे या यूएनपी की तरफ से तत्काल कोई रिएक्शन नहीं आई है राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की पार्टी ने उनके  विक्रमसिंघे के बीच तनाव बढ़ने के बीच शुक्रवार को सत्तारूढ़ साझेदारी से समर्थन वापस ले लिया

श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी)  यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) की साझेदारी गवर्नमेंट उस समय संकट में आ गयी थी जब पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे की नई पार्टी ने फरवरी में लोकल चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की थी जिसे सत्तारूढ़ साझेदारी के लिए जनमत संग्रह माना गया पिछले हफ्ते समाचार आई थी कि सिरिसेना ने अपने वरिष्ठ साझेदारीसाझेदार यूएनपी पर उनकी  रक्षा मंत्रालय के पूर्व शीर्ष ऑफिसर गोताभया राजपक्षे की मर्डर की कथित साजिश को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया गोताभया राजपक्षे पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई हैं

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