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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के भीतर टकराव, इस बात की है चिंता

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के भीतर टकराव जिस तरह से सार्वजनिक हुआ है उसको लेकर सरकार काफी नाराज है। दरअसल सरकार को इस बात का भय है कि आरबीआई के भीतर का टकराव सार्वजनिक होने की वजह से इसक निवेशकों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है और देश की छवि खराब हो सकती है। गौरतलब है कि शुक्रवार को आरबीआई के डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना काफी नुकसानदायक हो सकता है। यही नहीं उन्होंने कहा था कि बैंक सरकार के दबाव में अपनी नीतियों में बदलाव कर रहे हैं, जिसका नुकसान हो सकता है।

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सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा .

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अपने भाषण में आचार्य ने अर्जेंटीन का उदाहरण देते हुए कहा कि 2010 में सरकार के हस्तक्षेप का क्या परिणाम हुआ वह सबको पता है। इसकी वजह से दक्षिण अमेरिका की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा था। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप से आज नहीं तो कल वित्तिय बाजार में अस्थिरता आएगी, जिससे बाजार को नुकसान पहुंच सकता है और संस्थान की कार्यप्रणाली बिगड़ सकती है। वहीं सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि सरकार बैंक की स्वतंत्रता का सम्मान करती है लेकिन बैंक को भी अपनी जिम्मेदारी का खयाल रखना चाहिए।

पीएमओ दुखी

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस बात को लेकर दुखी है कि आरबीआई ने आंतरिक विवाद को लोगों के बीच जाहिर किया। सरकार इस बात से काफी नाराज है, उसे आरबीआई से ऐसी उम्मीद नहीं थी। आपको बता दें कि हाल ही में सरकार ने आरबीआई से कहा था कि देश के कुछ बैंकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दर को कम करे। यही नहीं सरकार नए रेग्युलेटरी के जरिए आरबीआई की ताकत को भी कम करने की तैयारी कर रही है।

उर्जित पटेल से नाराजगी

जिस तरह से पीएम मोदी के जापान दौरे पर रवाना होने से पहले आचार्य ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला उसकी वजह से केंद्रीय नेतृत्व काफी नाराज है। एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह से आरबीआई ने यह प्रकरण शुरू किया है उसकी उम्मीद नहीं थी। उर्जित पटेल जिन्हें खुद पीएम मोदी ने नियुक्त किया था, उनसे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वह इस पूरे विवाद को इस तरह से लोगों के बीच आने देंगे।

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