ममता सरकार मिला शिवसेना का साथ, करने जा रहे ये काम

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शिवसेना ने कहा, ‘जिन राज्यों में अपनी पसंदीदा सरकारें नहीं चुनी जाती हैं, उनका लगातार अपमान अथवा सताने की नीति खतरनाक है, लेकिन क्या संविधान वास्तव में केंद्र को ऐसा करने का अधिकार देता है?

मनमोहन सिंह, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी इन अतीत के प्रधानमंत्रियों के समय में केंद्र-राज्य के बीच संघर्ष की चिंगारी नहीं भड़कती थी.’

शिवसेना ने कहा, ‘रक्षा, विदेशी मामलों, आंतरिक सुरक्षा, देश की अर्थव्यवस्था का अधिकार केंद्र के पास ही होना चाहिए, लेकिन केंद्र सरकार अन्य मामलों में जो राजनीतिक मनमानी और अहंकार की अति करती है, यह हमारे संविधान को मंजूर नहीं है और ऐसा व्यवहार गैरकानूनी है. विभिन्न राज्यों के अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्त पर जाते हैं और सरकार चलाते हैं.’

शिवसेना ने पूछा, ‘जिन राज्यों ने आपकी पसंद की सरकार नहीं चुनी, उन राज्यों पर लगातार आंखें तरेरना जुल्म नहीं है तो क्या है? हमारे संविधान ने ‘संघराज्य’ ऐसा स्पष्ट रूप से कहा है. ‘केंद्रीय सरकार’ ऐसा नहीं कहा है, यह महत्वपूर्ण है. खुद को ‘केंद्र’ कहनेवाली सरकार का वर्तमान असीमित प्रभुत्व एक संघ राज्य की संवैधानिक अवधारणा के साथ असंगत है.’

शिवसेना ने कहा, ‘आज केंद्र को ऐसा लगता है कि राज्य उसके पायदान या गुलाम बनकर रहें. यदि राज्यों में चुनी हुई सरकारों ने अलग भूमिका अपनाई तो ‘केंद्रीय’ की हैसियत से दिल्ली की जांच एजेंसियों को राज्य के नेताओं के पीछे लगा दिया जाता है. बंगाल के नारदा प्रकरण में कुल छह आरोपी थे. इनमें से चार को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है.’

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा, ‘राज्यों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त पद पर आसीन अधिकारियों पर केंद्र द्वारा दबाव बनाना तर्कसंगत नहीं है. हमारे पास एक ‘संघीय’ राज्य प्रणाली है. मेरा मतलब है, एक संघीय व्यवस्था है, लेकिन राज्य केंद्र या संघ के गुलाम नहीं हैं.’

केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को लेकर सियासी तकरार जारी है. इस पूरे मामले में ममता सरकार को शिवसेना का साथ मिला है. केंद्र पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा कि चक्रवाती तूफान यास आया और चला गया, लेकिन उसकी वजह से उठा अहंकार का तूफान बंगाल की खाड़ी में आज भी गर्जना करता दिख रहा है.

 

 

 

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