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भारत में वेश्‍यावृत्ति का कड़वा इतिहास 17वीं सदी में हुआ था शुरू

वेश्‍यावृत्ति का कड़वा इतिहास
भारत में वेश्‍यावृत्ति का चलन आज का नहीं बल्कि सदियों से चला आ रहा है। प्राचीन भारत में ‘नगरवधु’ हुआ करती थीं। दूसरीं सदी में ईसापूर्व में लिखी गई संस्‍कृत की कहानी मृचाकाटिका में वैशाली की नगरवधु इसी काम के लिये जानी जाती है।

वेश्‍यावृत्ति का इतिहास 17वीं सदी में
17वीं और 16वीं सदी में गोवा में पुर्तगाली कालोनी हुआ करती थी। यहां पर जापानी दासियां हुआ करती थीं, जिनमें अधिकांश जापान की महिलाएं व कम उम्र की लड़कियां होती थीं, जिन्‍हें दासी बनाकर उनके साथ सेक्‍स किया जाता था। पुर्तगाली व्‍यापारी इन लड़कियों को जापान से पानी के जहाज में भारत लाते थे। यही कारण है कि सदियों से गोवा देह व्‍यापार का गढ़ बना हुआ है।

19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में
19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों ने यूरोप और जापान से लड़कियों को लेकर आते थे और भारत में काम कर रहीं अंग्रेजों की सेनाओं में सैनिकों को यौन सुख पहुंचाने का दबाव डालने लगे। ये वेश्‍याएं सैनिकों को यौन सुख प्रदान करती थीं। यह भी एक बड़ा कारण है कि हजारों की संख्‍या में भारतीय लोग अंग्रेजी सेना में यौन सुख के लालच में भर्ती हुए।

अंग्रेज़ शासन में वेश्‍यावृत्ति
20वीं सदी के आते-आते क्रूर अंग्रेजों ने भरतीय लड़कियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया। यूरोप से आयीं वेश्‍याएं जब अपनी सेवाएं देने में अक्षम हो जातीं, तो उन्‍हें छावनी में सैनिकों की सेवा करने व उनके लिये भोजन पकाने के लिये तैनात कर दिया जाता।

18 की होने से पहले ही बनीं वेश्‍या
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की 2007 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 30 लाख से ज्‍यादा फीमेल सेक्‍स वर्कर हैं, जिनमें 35.47 सेक्‍स वर्कर 18 साल की आयु से पहले ही वेश्‍या बन गईं। वहीं ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट ने और भी खतरनाक आंकड़े प्रस्‍तुत किये। इस रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत में 2 करोड़ सेक्‍स वर्कर हैं। जिनमें सिर्फ मुंबई में ही 2 लाख हैं। 1997 से 2004 के बीच वेश्‍याओं की संख्‍या में 50 फीसदी इजाफा हुआ।

एचआईवी संक्रमित हो रहा सूरत
एड्स कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात का सूरत शहर तेजी से एचआईवी की चपेट में आ रहा है। 1992 में यहां पर कुल वेश्‍याओं में 17 प्रतिशत एचआईवी से ग्रसित थीं, वहीं सन 2000 में बढ़कर 43 प्रतिशत हो गईं। 2008 की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2008 में यहां की कुल वेश्‍याओं में 58 फीसदी एचआईवी संक्रमित पायी गईं। यानी सूरत में वेश्‍यावृत्ति के जाल में फंसने का मतलब एड्स को न्‍योता देना है।

महाराष्‍ट्र-कर्नाटक में देवदासी बेल्‍ट
आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि महाराष्‍ट्र और कर्नाटक के बॉर्डर पर एक के बाद एक गांव व कस्‍बे हैं, जहां वेश्‍यावृत्ति का व्‍यापार फलफूल रहा है। इन इलाकों को ‘देवदासी बेल्‍ट’ भी कहा जाता है।

देश का सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया कोलकाता में
देश का सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया कोलकाता का सोनागाची इलाका है। दूसरे नंबर पर मुंबई का कामतिपुरा, फिर दिल्‍ली की जीबी रोड, आगरा का कश्‍मीरी मार्केट, ग्‍वालियर का रेशमपुरा, पुणे का बुधवर पेट हैं। इन स्‍थानों पर लाखों लड़कियां हर रोज बिस्‍तर पर परोसी जाती हैं।

छोटे शहरों में रेडलाइट एरिया
यह कहना गलत नहीं होगा कि सेक्‍स टूरिज्‍म के बड़े स्‍पॉट माने जाते हैं। इनके अलावा अगर 2-टियर व 3-टियर शहरों की बात करें तो वाराणसी का मडुआडिया, सहारनपुर का नक्‍कासा बाजार, मुजफ्फरपुर का चतुर्भुज स्‍थान( आंध्र प्रदेश के पेड्डापुरम व गुडिवडा, इलाहाबाद का मीरागंज, नागपुर का गंगा जुमना और मेरठ का कबाड़ी बाजार इसी काम के लिये फेमस हैं।

12 लाख से ज्‍यादा बच्चियां हैं वेश्‍याएं
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश में 12 लाख से ज्‍यादा बच्चियां वेश्‍यावृत्ति के कार्य में लिप्‍त हैं। यह खुलासा देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्‍यूरो की रिपोर्ट में हुआ, जो मई 2009 में प्रकाशित की गई।

10 करोड़ महिलाएं वेश्‍यावृत्ति में
सीबीआई की रिपोर्ट, जिसे गृह सचिव मधुकर गुप्‍ता ने जारी किया उसके अनुसार देश में 10 करोड़ महिलाएं वेश्‍यावृत्ति में फंस चुकी हैं। इनमें 40 फीसदी बच्चियां शामिल हैं।

90 प्रतिशत लड़कियां देश के अंदर बेची जाती हैं
सीबीआई की रिपोर्ट 2009 के अनुसार देश में देह व्‍यापार में लिप्‍त लड़कियों में से 90 प्रतिशत तो देश के अंदर ही एक कोने से दूसरे कोने में ले जाकर बेच दी जाती हैं।

देवस्‍थानों पर बढ़ रही वेश्‍यावृत्ति
सीबीआई की रिपोर्ट 2009 के अनुसार देश के तमाम देवस्‍थानों पर जहां लाखों की संख्‍या में तीर्थयात्री ईश्‍वर के विभिन्‍न रूपों के दर्शन करने आते हैं, वहां पर वेश्‍यावृत्ति तेजी से बढ़ रही है। यह चलन वर्ष 2000 के बाद से तेजी से बढ़ा है। तत्‍कालीन गृह सचिव मधुकर गुप्‍ता के अनुसार सीबीआई अभी तक आंकड़े नहीं जुटा पायी है कि कितनी लड़कियां देवस्‍थानों के आस-पास बने होटलों, धर्मशालाओं व गेस्‍ट हाउस में अपनी यौन सेवाएं दे रही हैं।

बंगाल की चुकरी प्रथा
सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि हमारे देश के कई हिस्‍सों में वेश्‍यावृत्ति को बढ़ावा देने वाली कई प्रथाएं चली आ रही हैं। उदाहरण के तौर पर बंगाल की चुकरी प्रथा ही ले लीजिये, जिसके अंतर्गत यदि कोई व्‍यक्ति कर्ज चुकाने में नाकाम रहता है, तो उसके परिवार की महिलाओं को अपना शरीर देकर कीमत चुकानी होती है। इसके अंतर्गत एक साल तक लड़की को वेश्‍या के रूप में मुफ्त में काम करना होता है। इसके लिये 1976 में में सरकारी कानून आया, जिसके अंतर्गत तब से अब तक करीब 2,850,000 महिलाओं को कर्ज चुका कर छुड़ाया जा चुका है।

पविार के पालन पोषण के लिये बनीं वेश्‍या
वेश्‍यावृत्ति का एक और कड़वा सच यह है कि जब परिवार में आय के साधन बंद हो जाते हैं, तब परिवार की सबसे बड़ी लड़की यह राह चुनती है। एक रिपोर्ट के अनुसार वेश्‍यावृत्ति में आयीं महिलाओं में 22 फीसदी सिर्फ इसी कारण आयीं।

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