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तुर्की में नज़र आने वाला ये संकट, छीन सकता है इस राष्ट्रपति की कुर्सी

यहां नज़र आने वाले गड्ढे किसी फ़ुटबॉल मैदान जितने बड़े हैं, जो 50 मीटर यानी क़रीब 165 फ़ीट की गहराई तक खुदे हुए हैं. चट्टानों के ढेर से मानो सतह बनी हुई हो. लेकिन यहां जीवन का अभाव है, केवल सीगल (एक तरह का जानवर) मिलते हैं जो गंदे पानी को पीकर जीवित रहते हैं.

दरअसल इस्तांबुल के फिकिरतेपे नाम के इस ज़िले को इस्तांबुल के चमचमाते विकास का ठिकाना होना चाहिए था, जहां भव्य अपार्टमेंट, चमकदार शॉपिंग माल्स और स्पा होने चाहिए थे.

कम से कम 2010 में जारी एक वीडियो में इस इलाके के ऐसे ही होने की कल्पना की गई थी. इसके लिए इलाके में बसे हुए क़रीब 15 हज़ार लोगों के घरों को नष्ट किया गया. कईयों ने अपनी जमापूंजी इलाके में विकसित होने वाले प्रोजेक्ट्स में लगा दी.

लेकिन जैसे ही वित्तीय संकट सामने आया, निवेशकों ने अपने क़दम खींच लिए और इलाके में जिन बिल्डिंगों को बनाने की योजना थी, उनमें से अधिकांश नहीं बन पाए. एक तरफ दिवालिया कंपनियां हैं और दूसरी तरफ हक्के बक्के लोग जिनसे किए हुए वादे चकनाचूर हो चुके हैं.

इससे अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है, बीते 16 साल से तुर्की की सत्ता पर काबिज रेचेप तैय्यप अर्दोआन के लिए ये आर्थिक मंदी सबसे बड़े ख़तरे के तौर पर सामने आई है.

इस हफ़्ते होने वाले स्थानीय चुनाव से पहले के सर्वेक्षणों से यह ज़ाहिर हो रहा है कि सत्तारूढ़ एके पार्टी राजधानी अंकारा और संभवतः इस्तांबुल पर से भी अपना नियंत्रण खो सकती है.

मुझे उससे घृणा है

ज़ेनेप डोज़गूनोलदू, साठ साल की महिला हैं. आंखों में आंसू के साथ ज़ेनेप अपना पुराना घर दिखाती हैं जो अंजीर के पेड़ के पीछे होता था.

लड़खड़ाती जुबान में ज़ेनेप बताती हैं, “लोग मेरे घर को खूबसूरत किचन वाला घर कहा करते थे. लेकिन अब रुकसाक बैग (पीठ पर लाद कर चलने वाला बैग) ही मेरा घर है. बच्चों से पैसे मांगने में मुझे शर्म भी आती है.”

फिरडेव्स उलउकाक का घर एक निर्माणाधीन साइट के किनारे पर था, जो पूरी तरह नहीं बन पाया लेकिन निर्माणाधीन साइट की खुदाई के चलते उनका घर भी प्रभावित हुआ. लिहाजा वह अपना गुस्सा मौजूदा राष्ट्रपति पर निकालते हुए उन्हें तुर्की का बिल्डर इन चीफ़ कहती हैं.

फिरडेव्स के मुताबिक, अब वह राष्ट्रपति के प्रति घृणा महसूस करने लगी हैं. वह कहती हैं, “मैंने हमेशा उन्हें वोट दिया लेकिन उन्होंने लोगों को बर्बाद कर दिया.”

बीते 16 सालों में अर्दोआन ने तुर्की के विकास में निर्माण कार्य को इंजन के तौर पर इस्तेमाल किया है. उनके मेगा प्रोजेक्ट जिसमें एयरपोर्ट, पुल और सुरंग सब शामिल हैं, ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर बदल दी है.

फिरडेव्स उलउकाक राष्ट्रपति के प्रति अपना गुस्सा ज़ाहिर करती हैं

इतना ही नहीं अर्दोआन ने आसमान चूमती हाउसिंग इमारतों के ज़रिए भी शहरों की रूपरेखा बदल कर रख दी है. राष्ट्रपति के नजदीकी और कंस्ट्रक्शन के कारोबार के मुग़लों, को राजनीतिक समर्थन के चलते सरकारी ठेके मिल जाते हैं. यह इंडस्ट्री भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद के दलदल में फंसी हुई है.

इन सबके बीच महंगाई की दर अब 20 फ़ीसदी तक पहुंच चुकी है, तुर्की की मुद्रा लीरा का मूल्य करीब एक तिहाई कम हो चुका है, ऐसे में कच्चे सामान का आयात महंगा हो चुका है और विदेशी कर्ज़ लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसे में कंस्ट्रक्शन के काम में लगीं कंपनियां नाकाम हो रही हैं.

फिकिरतेपे प्रोजेक्ट को चलाने वाले कंस्ट्रक्शन के बड़े कारोबारियों में से एक पाना यापी ने बीबीसी से बताया, “पूरा देश आर्थिक संकट में है और कंस्ट्रक्शन का क्षेत्र भी संकट में हैं.”

यही वजह है कि हवा में झूलते हुए क्रेनों ने काम करना बंद कर दिया है, आसमान को चूमती इमारतें आधी अधूरी खड़ी हैं, ये सब इंस्ताबुल के संकट को बताने के लिए काफी हैं.

तुर्की में बीते साल आर्थिक मंदी आई और इस अंतिम तिमाही में तुर्की की अर्थव्यवस्था तीन फीसदी और भी सिकुड़ गई है. कई विश्लेषकों को आशंका है कि इससे भी ख़राब हालत होनी है.

इस्तांबुल इकॉनामिक रिसर्च के महाप्रबंधक कैन सेलचुकी बताते हैं, “तुर्की काफी हद तक विदेशी कर्जे़ पर निर्भर है जब उस कर्ज़ को चुकाने में मुश्किल होने लगी है तो आप देख रहे हैं कि हम किस संकट में आ गए हैं.”

वह कहते हैं, “हमलोग बड़े संकट के मुहाने पर हैं. हमें बहुत बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा चाहिए, इसके लिए हमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद मांगनी चाहिए.”

हालांकि राष्ट्रपति अर्दोआन, अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लोन लेने का विरोध करते आए हैं, क्योंकि आईएमएफ से लोन लेने के लिए कड़ी शर्तों को मानना होता है.

वहीं दूसरी ओर सेलचुकी कहते हैं, निवेश नहीं आने पर हमारे यहां दिवालियापन बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिलेगी.

अक्टूबर 2018 में इंस्ताबुल में एक नया एयरपोर्ट खोला गयाय

मंदी से अर्दोआन की सत्ता जाएगी

आर्थिक मंदी के चलते राष्ट्रपति को कुछ दूसरे मुद्दों की तरफ रुख करना पड़ा है. चुनावी रैलियों में वे अपने निष्ठावान समर्थकों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें न्यूज़ीलैंड की मस्जिद पर हुए हमले का वीडियो भी दिखा रहे हैं.

खाने पीने की चीज़ों के दाम (जो तीन गुना तक बढ़ चुके हैं) पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने किसानों से सीधे सब्जियां ख़रीद कर लोगों को बेचना शुरू किया है. बिचौलियों को दूर करने के लिए सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर अपने स्टाल लगाए हैं. राष्ट्रपति ने इन बिचौलियों को फूड टेररिस्ट तक कहा है.

इस्तांबुल के ही अकसारे में स्थित ऐसे ही एक स्टॉल पर टमाटर, बैगन और पालक ख़रीदने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी है, यहां पर ये चीज़ें सुपरमार्केट की तुलना में आधे दाम पर मिल रही हैं.

स्टॉल के दुकानदार ओमर काकिर्का बताते हैं, “इस लंबी कतार से ग़रीबी नहीं ज़ाहिर होती है बल्कि लोग इस अवसर का फ़ायदा उठा रहे हैं, हर किसी को यह योजना पसंद आयी है. जब सेल लगती है तो हर कोई वहां जाता ही है.”

लेकिन इसरेफ़ कोर्कमाज़ इससे असहमत हैं. वे बताते हैं, “मैंने आज खीरा और टमाटर ख़रीदे हैं, लेकिन यह योजना केवल चुनाव को देखकर शुरू की गई है. ये इसे अप्रैल के बाद चालू नहीं रखेंगे. मैंने पहले तो अर्दोआन को वोट दिया था लेकिन अब आगे नहीं दूंगा क्योंकि आर्थिक स्थिति बेहद ख़राब है. मैं इस बार विपक्ष के उम्मीदवार को आजमाउंगा.”

तुर्की की अर्थव्यवस्था ने ही रेचेप तैय्यप अर्दोआन की सत्ता को बुलंद किया था. यही अर्थव्यवस्था उन्हें बाहर का रास्ता भी दिखा सकती है.

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