Wednesday , December 2 2020 23:56
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चीन ने इस देश को दी ये आखरी धमकी , कहा दूर रहो वरना निकाल लेंगे आँखे…

इन देशों के संयुक्त बयान में प्रस्ताव को चीन की अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं और हांगकांग को उच्चस्तरीय स्वायत्तता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करने के उसके वादे का उल्लंघन बताया गया है।

 

चीन ने इस देश को दी ये आखरी धमकी , कहा दूर रहो वरना निकाल लेंगे आँखे...

ब्रिटेन ने लगभग 75 लाख की आबादी वाले हांगकांग शहर को 1997 में एक समझौते के तहत चीन को वापस सौंप दिया था, लेकिन समझौते में शर्त रखी गई थी कि 50 वर्ष बाद स्थानीय मामलों में हांगकांग को स्वायत्ता प्रदान की जाएगी।

अगर वे चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास संबंधी हितों को नुकसान पहुंचाने की हिमाकत करते हैं तो उन्हें अपनी आंखों को लेकर सावधान रहना चाहिए जिन्हें फोड़कर उन्हें अंधा किया जा सकता है।’

गौरतलब है कि पांचों देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा है कि हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक चार सांसदों को अयोग्य करार देने से संबंधित चीन सरकार का नया प्रस्ताव ‘सभी आलोचकों की आवाज दबाने के सोचे-समझे अभियान’ का हिस्सा प्रतीत होता है।

चीनी विदेश मं‍त्रालय के वुल्‍फ वॉरियर कहे जाने वाले लिजिआन ने कहा, ‘पश्चिमी देशों को सतर्क रहना चाहिए अन्‍यथा उनकी आंखों को निकाल लिया जाएगा।’ चीनी प्रवक्‍ता ने कहा, ‘चीन कभी कोई परेशानी नहीं खड़ा करता है और न ही किसी चीज से डरता है।’

चीनी प्रवक्‍ता ने कहा कि पश्चिमी देशों को इस ‘सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए’ कि चीन पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी हॉन्‍ग कॉन्‍ग को वापस पा चुका है।

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड और कनाडा ने आपस में खुफिया साझेदारी कर रखी है जिसे ‘फाइव आइज़’ यानी पांच आंखें कहा जाता है। लिजिआन ने कहा, ‘उनकी पांच आखें हैं या दस, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

हांगकांग मुद्दे को लेकर बौखलाए चीन ने अब अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड और कनाडा को धमकी दी है। इन पांचों ही पश्चिमी देशों ने चीन के विरोधियों को हांगकांग में सांसद नहीं चुने जाने के लिए नए नियम बनाने की आलोचना करने के लिए ‘फाइव आइज’ गठबंधन बनाया है।

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड और कनाडा ने चीन से कहा है कि वह अपने नए नियमों को वापस ले। इस पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता झाओ लिजिआन ने पश्चिमी देशों को ‘आंखें’ निकाल लेने की चेतावनी दी कि वे चीन के मामलों से दूर रहें।

 

 

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