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क्या मोदी सरकार की गणित में फंसे आम लोग

लोग इस बात से भी काफी हैरान है कि सरकार पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से रोकने के लिए कोई उचित कदम क्यों नहीं उठा रही है। वहीं अगर विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले समय में पेट्रोल डीजल के दाम पर और भी बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है।

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नहीं घट रहा पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क- बता दें, मोदी राज में तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, हालांकि अर्न्तराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमत ठीक ठाक है। साथ ही 2014 के बाद कच्चे तेल के दाम में खासा कमी देखने को मिली थी, लेकिन इन सबके बावजूद मोदी सरकार ने जनता से वसूले जाने वाले टैक्स में कोई भी कमी करने को तैयार नहीं है, जिसके कारण जनता इसका फायदा नहीं उठा पा रही है। हालांक इसमें सिर्फ केंद्र सरकार को ही जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, क्योंकि राज्य सरकारें भी इसमें भागीदार है।

रुपया का कमजोर होना और ईरान से कच्चे तेल बंद करने का फैसला पड़ रहा भारी- इसके अलावा अगर देखा जाए तो बीते कुछ समय से डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है, जिसका सीधा असर पेट्रोल डीजल के दाम में बढोत्तरी के रूप में देखने को मिल रहा है। वहीं अब अमेरिका के दबाव से ईरान से कच्चे तेल लेने से भी भारत कतरा रही है, लेकिन ईरान से कच्चे तेल की खरीदारी में दूसरे नंबर पर मौजूद भारत को अब इस आपूर्ति को पूरा करने के लिए खाड़ी देशों की तरफ रूख करना पड़गा, जिसका असर भी पेट्रोल डीजल के दाम पर निश्चित तौर पर देखने को मिलेगा। ऐसे में अब मोदी सरकार को इन चुनौतियों से पार पाना आसान नहीं होना है।

पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने के लिए मोदी सरकार को इन नीतियों पर करना होगा काम– वहीं अगर केंद्र सरकार चाहें तो पेट्रोल-डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी को कम करके जनता को इस परेशानी से काफी हद तक निजात दिला सकती है। वहीं डॉलर के मुकाबले रूपया को कमजोर होने से बचाने के लिए भी मोदी सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। दरअसल डॉलर के मुकाबले अगर रूपया मजबूत होता है तो उसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दाम पर पडेगा। इससे साथ ही जीएसटी के दायरे में लाने से भी पेट्रोल-डीजल के दाम में बढोत्तरी से कुछ हद तक निजात मिल सकता है, लेकिन इसपर कई राज्य एकदम नहीं नजर आ रहे हैं।

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