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कोतवाली थाना से महज 600 मीटर दूरी पर था देह व्यापार का गढ़, ऐसे फंस जाते थे सीधे-साधे लोग

उत्तर प्रदेश के आगरा में कश्मीरी बाजार और माल का बाजार बीच शहर में है। कोतवाली थाना महज 600 मीटर दूर है। पुलिस फिर भी वहां चल रहे देह व्यापार के धंधे से बेखबर थी। आखिर क्यों। यह सवाल अभी भी उठ रहा है। छापेमारी में 32 महिलाओं को पकड़ा गया था, जिसमें से 11 कैद में थीं। उन्हें कोठों पर बेचा गया था।

पीड़ित युवतियों को नारी निकेतन भेजा गया है। शेष 21 महिलाओं और 11 पुरुषों को शनिवार को जेल भेजा गया। वहीं पकड़ी गई महिलाओं ने थाने में पुलिस पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए थे।

बनारस की गुड़िया संस्था ने डीएम और एसएसपी को अपनी गोपनीय रिपोर्ट दी थी। बताया था कि पुराने शहर में 24 कोठे संचालित हैं। जिनमें 125 से अधिक महिलाएं रहती हैं। सभी जगह देह व्यापार का धंधा चल रहा है। कोठों की जानकारी क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों को है। दुश्मनी के डर से कोई सामने नहीं आना चाहता है। क्षेत्रीय लोग भी इन कोठों से परेशान हो चुके हैं। इस सूचना पर शुक्रवार को छापेमारी कराई गई थी। सात कोठों पर छापा मारा गया था। 32 महिलाएं और 11 ग्राहक को गिरफ्तार किया गया था।

उधर, अधिकारी भी मौके पर आए। महिला पुलिस कर्मियों ने महिलाओं से पूछताछ की। पूछताछ में साफ हुआ कि 11 युवतियां पीड़िताएं हैं। वे अपनी मर्जी से नहीं रह रही थीं। कैद में थीं। उनसे जबरन देह व्यापार कराया जा रहा था। ये युवतियां मेरठ, असम, नेपाल, पश्चिमी बंगाल, आगरा आदि जगह से थीं। सभी को धोखे से कोठों पर बेचा गया था। कोई नौकरी की तलाश में घर से निकली थी तो किसी को प्रेमी ने धोखा दिया था। इन 11 युवतियों को पकड़ी गई महिलाओं से अलग किया गया।

इन्हें नारी निकेतन भेजा गया। 21 महिलाओं ने अपने बयान में कहा कि स्वेच्छा से यह काम करती हैं। कोई दूसरा काम नहीं कर सकती हैं। इसलिए उनका देह व्यापार निवारण अधिनियम में चालान किया गया। पकड़े गए 11 पुरुषों के खिलाफ भी इसी धारा के तहत कार्रवाई की गई।

चार घंटे थाने में चला हंगामा
कोतवाली थाने में शुक्रवार को चार घंटे तक हंगामा चला। छापेमारी के बाद महिलाओं को कोतवाली थाने लाया गया था। वहां देह व्यापार में लिप्त महिलाओं ने पुलिस को आड़े हाथ लिया। उनके आरोपों से यह तो साफ हो गया कि पुलिस कोठों पर हो रही हर गतिविधि से वाकिफ थी। पुलिस कर्मी कोठों पर महीनेदारी लेने जाया करते थे। 24 कोठों में से छह कोठे कोतवाली थाना क्षेत्र में आते हैं। शेष छत्ता थाना क्षेत्र में है।

एक भी कोठा संचालिका ऐसी नहीं थी जिसने रिश्वतखोरी का आरोप नहीं लगाया हो। कुछ महिलाओं ने तो यहां तक कहा कि सामने आने पर पुलिस कर्मियों को पहचान लेंगी। जो पैसा लेने आते हैं। इतना ही नहीं कई महिलाओं ने शरीरिक शोषण तक का आरोप भी लगाया था। हालांकि इसके उनके पास कोई प्रमाण नहीं थे। पुलिस यह बोलकर मामले को दबाना चाहती थी कि आरोप बेबुनियाद हैं। कार्रवाई के बाद ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। ऐसा था तो पहले कोई शिकायत क्यों नहीं की गई।

पुलिस को नजर क्यों नहीं आया
शुक्रवार को हुई कार्रवाई के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। उनके जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। छत्ता और कोतवाली थाने की पुलिस कठघरे में है। आखिर पुलिस को यह नजर क्यों नहीं आया कि कोठों पर देह व्यापार हो रहा है। जबकि पुलिस प्रतिदिन इस बाजार में गश्त करती है। रात को भी पुलिस की गाड़ियां पेट्रोलिंग करती हैं। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक कोठों पर कार्रवाई क्यों नहीं की थी। बिना महीनेदारी लिए पुलिस इन पर मेहरबान क्यों थी।

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